पैंगोलिन (Pangolin): कवचधारी रहस्यमयी जीव और संरक्षण की ज़रूरत

पैंगोलिन (Pangolin): रहस्यमयी कवचधारी जीव, जिसे दुनिया भूलती जा रही है

प्रकृति ने जब जीवों की रचना की, तो हर किसी को कुछ न कुछ खास दिया। किसी को तेज़ दाँत, किसी को तेज़ दौड़, किसी को ज़हर और किसी को चतुर दिमाग। लेकिन पैंगोलिन को प्रकृति ने एक ऐसा अनोखा उपहार दिया, जो पूरी दुनिया में किसी और के पास नहीं है—लोहे जैसा मजबूत कवच।

पैंगोलिन ऐसा जीव है जिसे बहुत कम लोग जानते हैं, लेकिन जो जानता है, वह इसे देखकर हैरान रह जाता है। यह जानवर न तो पूरी तरह छिपकली जैसा है, न चींटीखोर जैसा और न ही किसी स्तनधारी से पूरी तरह मिलता-जुलता। फिर भी यह स्तनधारी जीव है, जो अपने बच्चों को दूध पिलाता है।

दुख की बात यह है कि आज यही अनोखा जीव दुनिया का सबसे ज्यादा तस्करी किया जाने वाला जानवर बन चुका है।

पैंगोलिन क्या है?

पैंगोलिन एक रात में सक्रिय रहने वाला, शर्मीला और शांत स्वभाव का स्तनधारी जानवर है। इसका शरीर सख्त, चमकदार और आपस में जुड़ी हुई शल्कों (Scales) से ढका होता है, जो इसे दुश्मनों से बचाने का काम करती हैं।

“Pangolin” शब्द मलय भाषा के शब्द “Pengguling” से आया है, जिसका अर्थ है – गेंद की तरह लिपट जाना।
और सच में, खतरा महसूस होते ही पैंगोलिन खुद को पूरी तरह गोल गेंद में बदल लेता है।

पैंगोलिन की प्रजातियाँ और निवास स्थान

दुनिया में पैंगोलिन की 8 प्रजातियाँ पाई जाती हैं:

एशिया में पाई जाने वाली 4 प्रजातियाँ:

भारतीय पैंगोलिन

चीनी पैंगोलिन

मलय पैंगोलिन

फिलीपीनी पैंगोलिन

अफ्रीका में पाई जाने वाली 4 प्रजातियाँ:

ग्राउंड पैंगोलिन

जायंट पैंगोलिन

ट्री पैंगोलिन

लॉन्ग-टेल पैंगोलिन

भारत में मुख्य रूप से भारतीय पैंगोलिन पाया जाता है, जो जंगलों, घास के मैदानों और कभी-कभी खेती के आसपास भी दिख जाता है।

शरीर की बनावट: चलता-फिरता कवच

पैंगोलिन का शरीर इसकी सबसे बड़ी पहचान है।

इसका शरीर केराटिन से बनी शल्कों से ढका होता है

यही केराटिन इंसानों के नाखून और बालों में भी पाया जाता है

एक पैंगोलिन के शरीर पर 1000 से ज्यादा शल्क हो सकते हैं

ये शल्क जन्म के समय नरम होते हैं, लेकिन समय के साथ कठोर हो जाते हैं

मज़ेदार बात:
पैंगोलिन का पेट और चेहरे का हिस्सा शल्कों से ढका नहीं होता, ताकि वह आसानी से खाना खा सके।

भोजन की आदतें: चींटियों का सफाया करने वाला

पैंगोलिन पूरी तरह से कीटभक्षी (Insectivore) है।

इसका मुख्य भोजन:

चींटियाँ

दीमक

छोटे कीड़े

खाने का तरीका:

इसकी जीभ बहुत लंबी और चिपचिपी होती है

यह जीभ मुंह से बाहर निकालकर सीधे चींटियों के बिल में डाल देता है

एक रात में यह हज़ारों चींटियाँ खा सकता है

पैंगोलिन के दाँत नहीं होते, इसलिए यह खाना सीधे निगलता है।

स्वभाव और व्यवहार

पैंगोलिन बहुत ही:

शर्मीला

अकेला रहने वाला

शांत

रात में सक्रिय

जानवर है।

दिन में यह:

ज़मीन में बिल बनाकर

या पेड़ों के खोखलों में
छिपकर आराम करता है।

रात होते ही यह बाहर निकलकर भोजन की तलाश में निकलता है।

आत्म-रक्षा का अनोखा तरीका

पैंगोलिन के पास न तो तेज़ दाँत हैं, न पंजों से हमला करने की आदत।

उसकी रक्षा का तरीका है:
खुद को पूरी तरह गेंद में बदल लेना

शल्क बाहर की ओर

नरम शरीर अंदर की ओर

पूंछ से चेहरे को ढक लेता है

कई शिकारी इसके कवच को भेद ही नहीं पाते।

प्रजनन और बच्चे

पैंगोलिन साल में एक बार प्रजनन करता है

मादा आमतौर पर एक ही बच्चा जन्म देती है

बच्चा जन्म के समय नरम शल्कों वाला होता है

कुछ दिनों बाद शल्क सख्त होने लगते हैं

छोटा पैंगोलिन:

माँ की पूंछ पर चढ़कर चलता है

खतरे में माँ के शरीर से लिपट जाता है

पैंगोलिन खतरे में क्यों है?

आज पैंगोलिन अत्यंत संकटग्रस्त (Critically Endangered) जानवरों में शामिल है।

इसके मुख्य कारण:

अवैध शिकार

इसके शल्कों की तस्करी

जंगलों की कटाई

अंधविश्वास और झूठी दवाइयाँ

कुछ देशों में इसके शल्कों को दवाइयों में इस्तेमाल किया जाता है, जबकि वैज्ञानिक रूप से इसका कोई प्रमाण नहीं है।

दुनिया का सबसे ज्यादा तस्करी किया गया जानवर

यह जानकर हैरानी होगी कि:

पैंगोलिन, हाथी और गैंडे से भी ज्यादा तस्करी किया जाने वाला जानवर है।

इसके मांस को “लक्ज़री फूड” माना जाता है

शल्कों की कीमत लाखों में होती है

इसी वजह से हर साल हज़ारों पैंगोलिन मारे जाते हैं।

पैंगोलिन का पर्यावरण में महत्व

पैंगोलिन सिर्फ एक जानवर नहीं, बल्कि प्रकृति का संतुलन बनाए रखने वाला रक्षक है।

यह चींटियों और दीमक की संख्या नियंत्रित करता है

खेतों और जंगलों को नुकसान से बचाता है

इसकी खुदाई से मिट्टी हवादार होती है

अगर पैंगोलिन खत्म हुआ, तो पर्यावरण का संतुलन बिगड़ सकता है।

भारत में पैंगोलिन का संरक्षण

भारत में पैंगोलिन:

वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत संरक्षित है

इसका शिकार और व्यापार कानूनी अपराध है

कई NGO और वन विभाग मिलकर:

जागरूकता फैला रहे हैं

रेस्क्यू अभियान चला रहे हैं

हमें क्या करना चाहिए?

एक आम इंसान भी पैंगोलिन को बचाने में मदद कर सकता है:

अवैध व्यापार का विरोध
जागरूकता फैलाना
जंगलों की रक्षा
गलत दवाइयों और अफवाहों से बचना

पैंगोलिन न तो शेर की तरह दहाड़ता है,
न हाथी की तरह विशाल है,
न मोर की तरह सुंदर पंख फैलाता है।

लेकिन फिर भी,
यह प्रकृति का एक अनमोल रत्न है।

अगर हम आज नहीं चेते,
तो आने वाली पीढ़ियाँ पैंगोलिन को
सिर्फ किताबों और तस्वीरों में ही देखेंगी।

पैंगोलिन को बचाना, प्रकृति को बचाना है।

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